अगर नहीं जानते Augmented Reality और Virtual Reality में अंतर तो जान लीजिये आज

आज के समय में दुनिया बहुत तेजी से परिवर्तित हो रही है। सब कुछ ऑनलाइन हो रहा है। लोगो के  जरूरत की चीजें उनके घर तक पहुंच रही है। और ये सब संभव हो पाया है टेक्नोलॉजी के कारण। Augmented Reality और Virtual Reality उसी तकनिकी विकास की अगली सीढ़ी है जो बहुत तेजी से लोगो की ज़ुबान पर चढ़ रही है। लेकिन ar और vr में अंतर बहुत कम लोगो को पता होता है। अगर आप भी उनमे से एक हैं तो यह लेख खासतौर से आपके लिए है। लेख में उदाहरण के माध्यम से आपको AR एंड VR में क्या फ़र्क़ है बताएँगे। 

AR टेक्नोलॉजी और VR का फुल फॉर्म क्या है 

टेक्नोलॉजी की दुनिया में AR का मतलब augmented रियलिटी होता है जबकि VR का अर्थ वर्चुअल रियलिटी होता है। ये दोनों तकनीकी कॉन्सेप्ट्स आभासी दुनिया के बारे में बात करते हैं। ये एक ऐसी वर्चुअल दुनिया बनाते हैं जो हमारे वास्तविक दुनिया को कंप्यूटर स्क्रीन पर replicate करके हमें एक आभासी अनुभव (simulated experience) प्रदान करते हैं। 

AR और VR हिंदी में जानकारी 

वर्चुअल रियलिटी और ऑगमेंटेड रियलिटी हाल के दिनों में बहुत तेजी लोगो की ज़ुबान पर चढ़ा है। इसके पीछे की वजह इसकी रोमांचक क्षमता है जो लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती है। व्यापार से लेकर मनोरंजन और गेमिंग में AR और VR के लिए अपार संभावनाएं हैं। जहां तक बात है इस आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल का तो गेमिंग, ई कॉमर्स, एजुकेशन, हेल्थ, सुरक्षा प्रशिक्षण आदि में इसका इस्तेमाल बहुत तेजी से हो रहा है। 

बेहतरीन ग्राफ़िक्स और 3d विज़ुअल्स के इस्तेमाल से रियल और वर्चुअल वर्ल्ड को एक साथ लाकर शानदार यूजर एक्सपीरियंस प्रदान करना ही इसका उद्देश्य है। 5G technology भी इस दिशा में बेहतरीन योगदान दे रही है और आने वाले समय में एआर और वीआर डिजिटल और भौतिक दुनिया के मध्य दूरी को कम कर देगा। 

ऑगमेंटेड रियलिटी क्या है 

कल्पना कीजिए की आपके आसपास नज़र आने वाली चीजों को replicate (बिलकुल वैसा ही बनाना) करके एक डिजिटल दुनिया बना दी जाये जो बिलकुल वास्तविक दुनिया जैसी नज़र आये। सम्भव है ऐसा देखकर आपको बहुत हैरानी होगी साथ ही आपको ये बहुत रोमांचित भी करेगा। ऑगमेंटेड रियलिटी के साथ बिल्कुल ऐसा ही है। 

Augmented Reality आपके आसपास के वातावरण को डिजिटल फॉर्म में कन्वर्ट करके आपको एक Immersive अनुभव जैसा प्रदान करता है। आपको ऐसा लगता है की वो सब कुछ आपके सामने ही है। चीजें बहुत रियल नज़र आती है। 2016 में रिलीज़ होने वाला pokemon go इसी का एक उदहारण है जो की रियल वर्ल्ड के सीन को डिजिटल वर्ल्ड में बदल देता है और आपको एक बेहतरीन गेमिंग अनुभव प्रदान करता है। 

वर्चुअल रियलिटी क्या है 

ऊपर वाले उदाहरण के बाद एक ऐसा उदाहरण लीजिए  जिसमे आप एक ऐसी दुनिया में पहुंच जाते हैं जिसका वास्तविक दुनिया से कोई सम्बन्ध नहीं होता। मतलब यहां सब कुछ कंप्यूटर से तैयार है और वो पूरी तरह से आपके लिए एक नयी दुनिया है –  जो की वर्चुअल रियलिटी के आधार पर बनाई जाती है। 

कंप्यूटर तकनीक के इस्तेमाल से जो आभासी दुनिया बनाई जाती है उसे वर्चुअल रियलिटी कहते हैं। इसमें रियल वर्ल्ड  नहीं होता `सब कुछ तकनीकी की सहायता से तैयार किया जाता है। VR एक्सपीरियंस करने के लिए हेडसेट की आवश्यकता पड़ती है जिसमे कैमरा लगा होता है। इस तकनीक का गेमिंग में इस्तेमाल करने के साथ-साथ हॉस्पिटैलिटी, रियल एस्टेट, प्रोफेशनल ट्रेनिंग जैसे पायलट, मिलिट्री आदि में भी किया जाता है। 

एआर-वीआर का इतिहास  

1987 में scientist Jaron Lanier ने सर्वप्रथम virtual reality शब्द का प्रयोग किया था। जबकि augmented reality शब्द के इस्तेमाल को 1990 में Tom Codell ने सुझाव दिया था। हालांकि इसके पहले भी कुछ साहित्यिक किताबें छप चुकी जिसमे इस तरह की तकनीक की चर्चा की जा चुकी थी। जैसे इंग्लिश नावेल The Master Key और Pygmalion’s Spectacles, एक शार्ट स्टोरी में इसका जिक्र हो चुका था।  

Stereoscope डिवाइस सम्भवतः वर्चुअल रियलिटी का सबसे पहला उदाहरण था जो Charles Wheatstone के द्वारा बनाया गया था। यह एक ऑप्टिकल प्रणाली था जिसमे दाये और बाये आंखों से अलग-अलग पिक्चर दिखती थी। पहले virtual simulator 1957 में बना जिसका नाम The Sensorama था। इसके आविष्कारक अमेरिकी फिल्म निर्माता Morgan Heilig थे।  इस मैकेनिकल डिवाइस में stereoscopic 3D display के साथ-साथ वास्तविक हवा का आभास कराने के लिए पंखे भी लगे थे। साथ ही घूमने वाला चेयर भी था। यहां तक की गंध की पहचान के लिए भी इंतेज़ाम थे। दुर्भाग्यवश मशीन महँगी होने के कारण ज्यादा बिक नहीं पाई। 

इतिहास का सबसे पहले VR-AR helmet हार्वर्ड प्रोफेसर Ivan Sutherland ने अपने विद्यार्थी के साथ मिलकर 1968 में बनाया। उस समय इसका नाम The Sword of Damocles रखा गया। EyeTap पहला पोर्टेबल एआर डिवाइस था जिसे 1980 में बनाया गया था। 1987 में virtual reality शब्द को उछालने वाले Jaron Lanier ने EyePhone glasses और DataGlove बनाया। आज जैसे दिखने वाले आधुनिक डिवाइस को 2012 में Oculus ने लांच किया था। हालाँकि बाद मे फ़ेसबूक ने इस कंपनी को अधिग्रहीत कर लिया था। 

3D होलोग्राम क्या है 

वर्चुअल रियलिटी की दुनिया में 3D होलोग्राम की भी भूमिका महत्वपूर्ण है। 3D होलोग्राम कई मायनों में 3d वीडियो  वर्चुअल रियलिटी से अलग है क्यूंकि होलोग्राम को चारो दिशाओ से बिना कोई डिवाइस पहने देखा जा सकता है। होलोग्राम 3डी प्रोजेक्शन होता है अर्थात वर्चुअल नज़र आता है। लेकिन होलोग्राम मूव नहीं करता स्थिर रहता है। अगर ये रियल स्पेस में मूव करने लगे (जैसे वीडियो) या आप इस से इंटरैक्ट करने लगे तो यह वर्चुअल रियलिटी बन जाएगा।  होलोग्राम और वर्चुअल रियलिटी में यही अंतर है की होलोग्राम में चीजे स्थिर रहती है जबकि वीआर में चीजे मूव करती रहती है। 

एआर-वीआर तकनीक अंतर 

AR तकनीक VR तकनीक 
असली भौतिक दुनिया को ध्यान में रखते हुए एक डिजिटल इमेज तैयार करना कंप्यूटर की सहायता से एक डिजिटल simulated वर्ल्ड बनाना  
असली दुनिया और वास्तविक दुनिया का मिश्रण पूरी तरह से वर्चुअल वर्ल्ड पर आधारित 
एक यूजर अपनी वास्तविक दुनिया से नहीं कटता यूजर का अपनी वास्तविक दुनिया कटना 
Compatible smart devices की जरूरत जैसे स्मार्ट फ़ोन, टेबलेट, स्मार्ट लेन्सेस etc.  वर्चुअल रियलिटी एक्सपीरियंस करने के लिए हैंडसेट की आवश्यकता 
यूजर का रियल वर्ल्ड और वर्चुअल वर्ल्ड में अंतर कर पाना यूजर के लिए रियल और वर्चुअल वर्ल्ड में अंतर करना कठिन 

 

जिस तेजी से तकनीकी विकास हो रहा है उससे ये बात जाहिर है की आने वाले समय में सब कुछ ऑनलाइन माध्यम से ही संचालित होगा। यहां तक की डिजिटल दुनिया में आप करेंसी के इस्तेमाल से कुछ खरीद भी सकते हैं।  और ये सब संभव है डिजिटल करेंसी से। 

इसी के साथ मेटावर्स एक वर्चुअल दुनिया है जो हाल-फिलहाल में बहुत तेजी से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। इसमें लोगों के मनोरंजन की पूरी व्यवस्था है जिससे लोग हर तरह से खुद को टेक्नोलॉजी के साथ immerse सके। यह यूजर को वर्चुअल 3डी स्पेस का उपयोग करने में सहायता करता है। 

वैसे तो AR और VR तकनीक बहुत एडवांस रूप है लेकिन इनमे मूल रूप से काफी अंतर है जिसको इस लेख में बताया गया है। उम्मीद करते हैं इस विषय पर आपको सम्पूर्ण जानकारी मिल गयी होगी और इसके बाद आप ar और vr टेक्नोलॉजी में भली भांति अंतर कर पाएंगे।

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