नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास कुछ ऐसा जिसपर हर भारतीय को गर्व होगा

Nalanda University – भारत दुनिया का एक अद्धभुत देश है। यहां की कला, संस्कृति, त्यौहार, परंपरा, रिवाज सब कुछ अनूठा है। शायद भारत में जितनी विविधता है, दुनिया के किसी देश में नहीं है। भारत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया है। शिक्षा के स्तर पर, आज बेशक भारत दुनिया के फलक पर पिछड़ा हो लेकिन अतीत में एक काल ऐसा भी रहा, जब भारत में स्थित शिक्षण संस्थान (educational institutions) में दुनिया भर से विद्यार्थी पढ़ने आते थे। यहां पर दी जाने वाली शिक्षा का दुनियाभर में महत्व था। यहां पढ़के विद्याथी गौरान्वित महसूस करते थे। जी हाँ हम बात कर रहे है नालंदा विश्वविद्यालय की, एक ऐसा शैक्षणिक संस्थान जो मशहूर था अपने उच्च स्तरीय पाठ्यक्रम के लिए। यहां पर बहुत सारे विषयो की पढाई करवाई जाती थी। बिहार राज्य के नालंदा जिला (nalanda district) में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष आज भी उस महान संस्थान की गौरव गाथा कहते हैं। जिसे भुलाये नहीं भुलाया जा सकता।

भारत बौद्ध धर्म और शिक्षा का केंद्र रहा है। यह एक ऐसा धर्म था जिसने दुनिया को शांति और सद्भावना (peace and harmony) का पाठ पढ़ाया। बौद्ध धर्म का विस्तार न केवल भारत में हुआ बल्कि विश्व के बहुत सारे देशो तक इसने अपनी पहुँच बनाई। इसके केंद्र में तक्षशिला (Takshshila) और नालन्दा जैसे विश्वविख्यात विश्वविद्यालय थे, जिन्होंने बौद्ध धर्म की शिक्षा को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया और इसके प्रसार में योगदान दिया। नालंदा विश्वविद्यालय उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र होने के साथ-साथ बौद्ध अनुयायियों के लिए भी बहुत मायने रखता है। दुनिया का एक महान विश्वविद्यालय किस तरह रचा, बसा और फिर उजड़ा, इसे ही हम बताने वाले हैं। इस लेख में हमने nalanda university ka itihas के साथ nalanda university kisne banaya और नालंदा विश्वविद्यालय क्यों प्रसिद्ध है, जैसे महत्वपूर्ण सवालों को शामिल किया है। नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास समझना इसलिए भी जरूरी है क्यूंकि इसका भारत से बहुत गहरा नाता है, अतीत की शिक्षा व्यवस्था कैसी थी इसे जानकार ही आज के युवा अपने बेहतर भविष्य के लिए योजना बना पाएंगे, साथ ही इस महान संस्थान के बारे में जानकार उन्हें अपने भारतीय होने पर गर्व का अनुभव भी होगा।

नालंदा का अर्थ – Meaning of Nalanda

जहां तक बात है नालंदा का मतलब की तो, ऐसा कहा जाता है की ये संस्कृत के शब्द से मिलकर बना है। नालंदा – ‘ नालम ‘ यानी की ‘ कमल ‘ और ‘ दा ‘ का मतलब ‘ देना ‘ , कमल को ज्ञान का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए इसका पूरा अर्थ हो जायेगा ‘ ज्ञान देने वाला ‘। इसके अलावा इसके अन्य अर्थ भी बताये जाते हैं जैसे ये भी माना जाता है की नालन्दा संस्कृत के शब्द ना + आलम + दा से मिलकर बना है, इसे एक ऐसे ज्ञान के रूप में परिभाषित किया जाता है जो ‘कभी रुकता नहीं’ है। इस तरह नालंदा को ज्ञान के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।

नालंदा यूनिवर्सिटी कहाँ है – Nalanda University Location

नालंदा विश्वविद्यालय बिहार की राजधानी पटना से लगभग 90 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित है। इसके पास का सबसे मशहूर टूरिस्ट डेस्टिनेशन राजगीर (rajgir tourist destination) है, जो अपने खूबसूरत प्राकृतिक नज़ारो के लिए जाना जाता है। यहां पर बहुत सारे सैलानी आते है। राजगीर भी एक बहुत महत्वपूर्ण शहर है, राजगीर मगध साम्राज्य (magadh empire) की राजधानी हुआ करती थी। राजगीर को प्राचीन समय में राजगृह (rajgriha old name) के नाम से जाना जाता था।

नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास – Nalanda University History in Hindi

प्राचीन समय में उच्च शिक्षा के लिए नालंदा विश्वविद्यालय का नाम अग्रणी था। इसमें पढ़ने वाले विद्यार्थी बहुत दूर-दूर से आते थे। आज भारत के जितने भी पडोसी मुल्क है उन सब से, किसी समय विद्यार्थी यहां आकर शिक्षा ग्रहण करते थे। नालंदा उच्च शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र तो था ही साथ ही में ये एक आवासीय विश्वविद्यालय (nalanda residential university) भी था जो इसकी खासियत बयां करती है। इस शिक्षा के केंद्र की ख्याति दूर-दूर तक थी। कहते हैं नालंदा विश्वविद्यालय में शिक्षा ग्रहण करना सबके बूते की बात नहीं थी क्यूंकि इसमें प्रवेश परीक्षा के आधार पर दाखिला होता था और ये प्रवेश परीक्षा बहुत कठिन हुआ करती थी जिसे उत्तीर्ण कर पाना सबके लिए संभव नहीं था। ऐसा नहीं है की नालंदा विश्वविद्यालय पहला विश्वविद्यालय था बल्कि इसके पहले भी भारत में एक विश्वविद्यालय मौजूद था जो की नालंदा से बहुत पहले बना था। इसका नाम तक्षशिला विश्वविद्यालय (takshashila university) था, जो अभी पाकिस्तान में है। लेकिन नालंदा की खासियत ये थी की ये अपने समय की सबसे आधुनिक शिक्षण संस्थान हुआ करती थी। जिसमे बहुत सारे विषयो को पढाई करवाई जाती थी। नालंदा विश्वविद्यालय का सम्बन्ध बौद्ध धर्म से भी है। ऐसा माना जाता है की गौतम बुद्धा और महावीर ने अपने जीवन के कुछ महत्वपूर्ण दिनों को नालंदा और राजगीर में बिताया था। यहां बौद्ध शिक्षा भी बहुत प्रचलित थी।

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना – Establishment of Nalanda University

नालंदा विश्वविद्यालय की स्थापना (nalanda vishwavidyalaya sthapna) का श्रेय गुप्ता वंश (gupta dynasty) के शासक कुमारगुप्त प्रथम (kumaragupta I) को जाता है। नालंदा विश्वविद्यालय का निर्माण पांचवी सदी में करवाया गया था। यह भारत ही नहीं बल्कि दुनिया का पहला आवासीय विश्वविद्यालय था। जिसमे पढ़ने के लिए बहुत से देशो से विद्यार्थी आते थे। शासक कुमारगुप्त प्रथम के बाद के शासको ने भी इस महान विश्वविद्यालय को संरक्षण देने का कार्य किया जिसमे सबसे प्रमुख नाम सम्राट हर्षवर्द्धन और पाल शासकों है। इन शासको ने अपने-अपने समय में अलग-अलग तरीके से इसे संरक्षित करने के साथ-साथ इसके विस्तार पर भी ध्यान दिया। नालंदा विश्वविद्यालय को दूसरा सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय माना जाता है। पहला सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला को कहा जाता है। ये अपने समय का बहुत ख़ास शैक्षणिक संस्थान था जो स्थापत्य कला का बहुत शानदार नमूना था।

नालंदा विश्वविद्यालय अध्ययन क्षेत्र – Nalanda University an Institution

नालंदा विश्वविद्यालय में प्रवेश पाना सबके लिए संभव नहीं था क्यूंकि इसमें बहुत कठिन परीक्षा के आधार पर दाखिला होता था। इस विश्वविद्यालय में योग्यतानुसार ही शिक्षा ग्रहण किया जा सकता था। यहां पर धर्मशास्त्र, व्याकरण, तर्कशास्त्र, खगोल विज्ञान, तत्वमीमांसा, चिकित्सा, दर्शनशास्त्र जैसे महत्वपूर्ण विषय पढ़ाये जाते थे। यहां पर जापान, चीन, इंडोनेशिया, कोरिया, तिब्बत, ईरान, फारस आदि देशो से छात्र आकर शिक्षा ग्रहण करते थे। कहते हैं इसके पुस्तकालय में हज़ारो की संख्या में पांडुलिपियों (manuscripts) सहित अन्य दुर्लभ हस्त लिखित पुस्तकें मौजूद थी जो ज्ञान का भंडार थी। इसके पुस्तकालय में आचार्यों और विद्यार्थियों के अध्ययन को सुगम बनाने के लिए हर तरह की अध्ययन सामग्री उपलब्ध थी। इसके अलावा यहां पर छात्रावास की सुविधा भी मौजूद थी जिसमे विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था थी। नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय की तीन बड़ी-बड़ी इमारतें थी जिनके नाम (nalanda library name) इस प्रकार थे :- रत्नरंजक (ratnaranjak), रत्नोदधि (ratnodadhi), रत्नसागर (ratnasagar)। नालंदा विश्वविद्यालय से नागर्जुन, धर्मकीर्ति, वासुदेव, धर्मपाल, शीलभद्र, जैसे दिग्गज व्यक्तित्व जुड़े थे।

नालंदा विश्वविद्यालय का वर्णन विदेशी यात्रियों द्वारा – Description of Nalanda University by foreign travelers

भारत में जब ज्ञान फल-फूल रहा था उस समय दुनिया के अलग-अलग कोने से यात्री आकर इस अद्भुत जगह को एक्स्प्लोर (explore) कर रहे थे। इसी कड़ी में चीन के एक यात्री, ह्वेनसांग (chinese traveler xuanzang) ने सातवीं शताब्दी में भारत का दौरा किया और नालंदा को अपने केंद्र में रखा। ह्वेनसांग एक बौद्ध भिक्षु था जो बौद्ध अनुयायी के रूप में भारत यात्रा करने आया था, और साथ ही भारत को समझना भी चाहता था। ह्वेनसांग ने कुछ समय नालंदा में भी बिताया था और यहां रहकर बौद्ध योगशास्त्र, तर्कशास्त्र, व्याकरण, संस्कृत आदि विषयो का अध्ययन किया। नालंदा के इतिहास की बहुत सी जानकारी ह्वेनसांग के विवरणों से मिलती है। इसके अलावा चीनी यात्री इत्सिंग ने भी नालंदा के बारे में बहुत कुछ बताया जिस से इस बात का पता चलता है उस दौर में ये विश्वविद्यालय किस तरह संचालित किया जाता था। इनके यात्रा वृत्तांत व संस्मरणों से नालंदा विश्वविद्यालय के बहुत बड़े शिक्षण केंद्र होने का पता चलता है।

नालंदा विश्वविद्यालय और बौद्ध शिक्षा – Nalanda University and Buddhist Education

प्रचीन समय में बौद्ध धर्म का विस्तार एक बहुत बड़े क्षेत्र तक था। बौद्ध अनुयायी न केवल भारत में बल्कि भारत के अलावा दूसरे देशो में भी देखे जा सकते थे। बौद्ध शिक्षा और इसके प्रसार के लिए समय-समय पर बहुत सारे लोगो ने प्रयास किये। बहुत से ऐसे सम्राट भी हुए जिन्होंने बौद्ध धर्म को अपने जीवन के केंद्र में रखा। ऐसे ही एक सम्राट का नाम सम्राट अशोक (samrat ashok) था। सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए बहुत से कार्य किये साथ ही बहुत सारे स्तूपों का भी निर्माण करवाया। नालंदा महाविहार (nalanda mahavihara) में भी काफी स्तूप और मठ थे, जिनमे बौद्ध-भिक्षु (buddhist monk) रहकर अपना ध्यान और अध्ययन किया करते थे। यहां बौद्ध शिक्षा केंद्र भी था। यही वजह है की बौद्ध भिक्षुओ के लिए ये जगह तीर्थस्थान के सामान था और दुनिया के अलग-अलग हिस्से से आकर यहां पर पढ़ना और रहना चाहते थे। यहां पर बौद्ध धर्म से सम्बंधित बहुत सी पांडुलिपियां भी अध्ययन के लिए उपलब्ध थी। ऐसा भी कहा जाता है की यहां पर भगवान बुद्ध की मूर्तियां भी थी जो ध्वस्त हो चुकी है।

नालंदा विश्वविद्यालय का पतन – Fall of Nalanda University

विश्व के महानतम विश्वविद्यालय में से एक नालंदा विश्वविद्यालय का पतन कैसे हुआ ये जानने की इच्छा लगभग हर उस व्यक्ति के मन में रहती है जिनकी इतिहास में रूचि है। कुछ प्रश्न जैसे nalanda university kisne jalaya को जानना जरूरी है। इस प्राचीन शिक्षा के केंद्र को एक हमले में ध्वस्त कर दिया गया था। बख्तियार खिलजी (bakhtiyar khilji) के आक्रमण ने नालंदा विश्वविद्यालय को आग के हवाले कर दिया और इसे नेस्तनाबूत करने का प्रयास किया। ऐसा कहा जाता है की बख्तियार खिलजी के बीमार पड़ जाने के बाद नालंदा विश्वविद्यालय के एक वैद्य ने बहुत ही चतुराई से बख्तियार खिलजी को ठीक कर दिया किन्तु आक्रमणकारियो के अपने वैद्य इलाज़ करने में नाकाम रहे जिस कारण प्रतिशोध की भावना के कारण इस ज्ञान के केंद्र को आग के हवाले करके तबाह कर दिया गया। ततपश्चात यहां रखी हज़ारो पांडुलिपियों और दुर्लभ हस्त लिखित पुस्तकें भी जलकर बर्बाद हो गए। इस तरह एक लम्बे अरसे तक चलने वाला ये ज्ञान का केंद्र बारहवीं शताब्दी में खंडहर में तब्दील हो गया।

नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष – Ruins of Nalanda University

हमले के उपरांत नालंदा महाविहार खंडहर में तब्दील हो गया। यहां पर एएसआई (archaeological survey of india) द्वारा 1915-37 और 1974-82 में की गई खुदाई ने इतिहास के इस बेहतरीन ढांचे से सम्बंधित बहुत से राज़ से पर्दा उठाया। एएसआई की खुदाई में ये बात सामने आयी की यहां पर ईंटों के छह मंदिर और ग्यारह मठों को एक यथाक्रम लेआउट (systematic layout) पर व्यवस्थित किया गया। इस पूरी संरचना से सम्बंधित एक महत्वपूर्ण बात ये सामने आयी की इसका 30 मीटर चौड़ा रास्ता उत्तर से दक्षिण की ओर बना है, इसके पश्चिम में कतार से मंदिरों की शृंखला है और पूर्व में मठ हैं।

यहां पर खुदाई में अबतक बुद्धा की बहुत सी मूर्तियां और चित्र भी मिल चुके हैं जो कांस्य (bronze), प्लास्टर (stucco), और पत्थर (stone) के बने है। इन्ही में कुछ महत्वपूर्ण अलग-अलग मुद्रा में प्राप्त बुद्ध की प्रतिमा (buddha in different posture) अवलोकितेश्वर , मञ्जुश्री , तारा , प्रज्ञापारमिता , जम्भला आदि है। इसके अलावा कुछ महत्वपूर्ण खोज जो नालंदा से खंडहरों से प्राप्त हुई है वो है भित्ति चित्र, टेराकोटा, पट्टिकाएं, पेंटिंग, पत्थर और ईंटों के शिलालेख, तांबे की प्लेट, मुहरें, सिक्के, मिट्टी के बर्तन आदि।

नालंदा विश्वविद्यालय यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल – Nalanda University UNESCO World Heritage Site

मठ और शैक्षिक संस्थान के रूप में नालंदा महविहार ने अपनी पहचान देश और दुनिया में बनाई। इसमें स्तूप, मंदिर, विहार (आवासीय और शैक्षिक भवन) आदि शामिल थे। इसने एक लम्बे अरसे तक देश और दुनिया को अपने ज्ञान दीप से प्रकाशित किया। साल 2016 में नालंदा महाविहार को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया गया। ये स्थान बौद्ध सर्किट (buddhist circuit) का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसी के साथ पर्यटन के लिहाज से भी बहुत मायने रखता है।

नालंदा विश्वविद्यालय का नया स्वरूप – Nalanda University Revival Hindi

नालंदा विश्वविद्यालय को एक नया स्वरुप देकर इसके पुराने वैभव को लौटाने के प्रयास की कड़ी में, बिहार के राजगीर में इसका एक नया कैंपस तैयार किया जा रहा है। इसका नया-नवेला रूप इतिहास और आधुनिकता के एक बेहतरीन नमूने को प्रस्तुत करता है। इसकी बनावट और निर्माण कला अद्भुत है। इसका नया ढांचा नालंदा महाविहार के उस पुराने गौरव की याद दिलाएगा, जिसका सैकड़ो साल पहले अस्तित्व था। इस महान nalanda university revival के लिए बहुत से देशो ने दिलचस्पी दिखाई साथ ही सहयोग भी किया। क्यूंकि उनका बौद्ध विचारो से बहुत गहरा नाता है। तो बहुत जल्द नालंदा विश्वविद्यालय अपने नए अवतार में नज़र आने वाला है।

नालंदा के खण्डहर आज बेशक अपने पुराने स्वरुप में न हो लेकिन इतिहास में एक दौर ऐसा था जब इसने देश और दुनिया को बड़े बड़े धुरंधर दिए, जिन्होंने अपने हुनर से समाज का कल्याण करने का कार्य किया। आज का नालंदा इतिहास के नालंदा से बेहद जुदा हो सकता है लेकिन आत्मा और भाव आज भी वही है, जो सैकड़ो साल पहले हुआ करती थी। आज भी यहां की दीवारें अपने गौरव गाथा का बखान करती है और यही वजह है की देश और दुनिया से बड़ी संख्या में लोग इसके दर्शन करने आते हैं। बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए तो ये तीर्थस्थल (buddhist pilgrimage site) के सामान है।

इस लेख में हमने nalanda university history in hindi के साथ साथ nalanda university kisne banaya को विस्तारपूर्वक बताया। नालंदा का इतिहास क्या है जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नो को जानना अति महत्वपूर्ण है क्यूंकि नालन्दा महाविहार का प्राचीन भारत से बहुत गहरा नाता है साथ ही इसे समझकर हम उस इतिहास को जी सकते हैं जिसका किसी दौर में अस्तित्व था। नालंदा विश्वविद्यालय का इतिहास युवाओ, छात्रों के साथ-साथ हर उस व्यक्ति से सम्बंधित है जिन्हे भारत के इस अद्भुत और ज्ञान के केंद्र के बारे में जानकारी होनी चाहिए। इसके अलावा नालंदा विश्वविद्यालय को क्यों जलाया गया था जैसे प्रश्नो को भी हमने इस लेख का हिस्सा बनाया ताकि आप इसके समग्र परिपेक्ष्य को जान सके। हर गुजरते वक़्त के साथ nalanda university story in hindi और अधिक प्रचलित होती जाएगी क्यूंकि जैसे-जैसे बच्चो तक इसकी जानकारी पहुंचेगी उन्हें खुद पर और इस इस देश की ज्ञान पर गर्व का अनुभव जरूर होगा।

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