बढ़ते वायु प्रदुषण का कारण और स्वस्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव क्या है?

आधुनिक समय की सबसे बड़ी समस्याओ में से एक है प्रदुषण की समस्या। बढ़ती शहरी आबादी, कारखानो और वाहनों से निकलती ज़हरीली गैसो ने लोगो का जीना मुहाल कर दिया है। वायु प्रदुषण की समस्या ने कई तरह के नए रोगो को जन्म दिया है जिसने लोगो के जीवन को और अधिक मुश्किल बना दिया है। अभी कोरोना जैसी महामारी से उबरे भी नहीं थे की वायु प्रदुषण की समस्या ने दस्तक दे दी। वायु प्रदुषण की समस्या न केवल लोगो को सामाजिक रूप से तोड़ रही है बल्कि यहाँ उनपर आर्थिक बोझ भी बढ़ा रही है।

विश्व के बड़े- बड़े देश ˈक्‍लाइमट्‌ सम्मलेन करके इस चुनौती से पार पाने की कोशिश कर रहे है लेकिन उनके प्रयास नाकाफी साबित हो रहे है। कर दाता के पैसो से होने वाले इन सम्मेलनों का कोई खास नतीजा नहीं निकल पा रहा है, इसके पीछे खास वजह है ये की विश्व की बड़ी बड़ी महाशक्तियों ने अपने समय पर पर्यावरण का खूब दोहन किया और अब वो छोटे और विकासशील देशो पर विभेदनकारी नीति थोपकर ‘अपना उल्लू सीधा करना चाहते है’। यदि ये देश सच में इन चुनौतियों से निबटना चाहते तो वजाये इन सम्मेलनों को ‘Photo Opportunity’ बनाने के, वो सबसे पहले पर्यावरण प्रदुषण के मूल में जो है उसपर चोट करते।

Pollution

अभी तक जैसा चल रहा है उसको देख के लगता है आने वाले दिन और चुनौतीपूर्ण होने वाले है क्यूंकि बेफिक्र सरकार, लापरवाह जनता और पूंजी के लिए लालायित पूंजीपति कभी भी अपने ‘कम्फर्ट जोन’ से बाहर आ के मानवता के लिए सोचने के लिए बिलकुल भी इच्छुक नज़र नहीं आते। वो दिन बहुत करीब आ गया है जब लोगो को बाहर निकलते समय अपने साथ एक ऑक्सीजन सिलिंडर भी कंधे पर लटका कर लेके जाना होगा। आने वाली पीढ़िया भी डर और दहशत के साए में जीयेंगी उन्हें कभी भी वो आज़ादी देखने को नहीं मिलेगी जो पुरानी पीढ़ियों ने देखा है, और इन सब का जिम्मेदार होंगे पैसे के पीछे भागती उस भौतिकवादी और स्वार्थपरकता से अभीभूत चंद लोगो से सजी मंडली।

हर साल वायु प्रदुषण से होने वाली मौतों में इजाफा होता जा रहा है और साथ ही बढ़ता जा रहा है वायु प्रदुषण से होने वाली बीमारियों को ठीक करने के खर्च। जल्द से जल्द स्वतः संज्ञान लेते हुए उचित कदम नहीं उठाये गए तो स्थिति बेहद वीभत्स हो सकती है lockdown जैसे उपाय भी नाकाफी साबित हो सकते है।

Leave a Comment