पटना का गोलघर क्यों बनाया गया था?

Golghar Patna – वर्तमान बिहार की राजधानी पटना एक ऐसा शहर है जिसका इतिहास सैकड़ो साल पुराना है। आज का जो बिहार हमें नज़र आता है अतीत मे ऐसा बिल्कुल नही था। बिहार किसी समय मे एक बहुत ही समृद्ध और संपन्न क्षेत्र हुआ करता था। बिहार की ख्याति दूर-दूर तक थी। उस समय ये मगध के नाम से मशहूर था। नालंदा विश्वविद्यालय, बोद्ध गया और राजगीर जैसे स्थान आज भी बिहार के समृद्ध इतिहास की गाथा गाते हैं। बिहार की धरती बडे-बडे लोगो का जन्म स्थान रह चुकी है। बिहार अपने भीतर एक ऐसे अतीत को समेटे हैं जिसे कभी नही भुलाया जा सकता। इसने हर दौर को बडे करीब से देखा है।

बिहार की राजधानी पटना (patna) मे एक गुम्बदनुमा संरचना मौजूद जिसे गोलघर (golghar) के नाम से जाना जाता है। बिहार मे रहने वाला शायद कोई ऐसा व्यक्ति हो जो इस इमारत के बारे मे ना जानता हो। गोलघर क्यूँ बनाया गया था इसे बहुत कम लोग जानते हैं। इसकी सबसे खास बात ये है कि गोलघर मे स्तंभ (pillar) नही है पूरा का पूरा ढांचा बिना पिलर के खडा है, और वो भी एक लम्बे अरसे से, हैं ना ताज्जुब की बात ? गोलघर बिहार के मशहूर दर्शनीय स्थल (bihar ke darshaniya sthal) मे से एक है। पटना घुमने जाने वाला सैलानी एक बार इसे देखने जरूर जाता है। इस लेख मे हम आपको गोलघर के बारे पूरी जानकारी उपलब्ध करवायेंगे। गोलघर का इतिहास, गोलघर किसने बनवाया था, गोलघर क्यों बनाया गया था। इस तरह के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के साथ golghar patna story in hindi को विस्तार बताएँगे।

गोलघर का मतलब – Meaning of Golghar

गोलघर का ढांचा गोल (circular) होने के कारण इसे गोलघर कहा जाता है। इसका निर्माण मुख्य रूप से अनाज के भण्डारण के लिए किया गया था। यह बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी (patna ganga river) की किनारे स्थित है। यह स्थान बिहार के मशहूर टूरिस्ट स्पॉट में शूमार है। इसे देखने बहुत सारे लोग आते हैं। यह ढांचा गुम्बदनुमा आकर में बना है। इसके शिकार पर से पूरे पटना शहर का शानदार नज़ारा दिखता है। पहले इसे द ग्रेनरी ऑफ़ पटना (the granary of patna) के नाम से भी जाना जाता था।

गोलघर का इतिहास -Golghar Patna History in Hindi

वर्ष 1770 में एक भयंकर सूखे से ये पूरा क्षेत्र त्रस्त था। कम वर्षा ने लोगो के जीवन को दयनीय बना दिया था। उस समय हालत कितने ज्यादा ख़राब थे इस बात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता हैं की एक करोड़ से भी अधिक लोग भूखमरी के कगार पर पहुँच गए थे। गोलघर के विशाल ढांचे को देखते हुए मन में प्रश्न आना स्वाभाविक है की पटना गोलघर को किसने बनवाया था (golghar patna kisne banaya)। सूखे को ध्यान में रखते हुए उस समय के गवर्नर जनरल वॉरेन हेस्टिंग (governor general warren hastings) ने अनाज भण्डारण के लिए एक अनाजग्रह (फौज के लिए) बनाने का नर्णय किया। इसी सम्बन्ध में ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन जॉन गार्स्टिन (captain john garstin) ने गोलघर बनाने का कार्य आरम्भ किया।

गोलघर का निर्माण कब हुआ – When was the Golghar built?

गोलघर का निर्माण 1784 को प्रारंभ हुआ। ब्रिटिश इंजीनियर कैप्टन जॉन गार्स्टिन द्वारा इसका निर्माण आरम्भ किया गया। इसका निर्माण कार्य 20 जुलाई, 1786 को संपन्न हुआ। ये ढांचा मुख्य रूप से अनाज के भण्डारण के लिए बनाया गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर अनाज की कमी की समस्या से निबटा जा सके। गोलघर में 140,000 टन अनाज को एक साथ भण्डारण कर के रखा जा सकता है।

गोलघर की खासियत – Features of Golghar

  • यह स्तूपनुमा ढांचा पटना में गंगा नदी के किनारे स्थित है।
  • गोलघर का पूरा ढांचा बिना पिलर (स्तंभ) के खड़ा है। इसमें एक भी पिलर नहीं है, ये इसकी सबसे बड़ी खासियत है।
  • वहीँ अगर बात की जाये गोलघर की आकार की तो ये 125 मीटर है, और ऊंचाई 29 मीटर है।
  • गोलघर की दीवारें 3.6 मीटर मोटी है।
  • गोलघर में 140,000 टन अनाज को रखने की क्षमता है।
  • गोलघर के टॉप पर जाने के लिए कुल 145 सीढिया चढ़नी पड़ती है।
  • यदि गोलघर के अंदर कोई बोलता है तो उसकी आवाज़ 27 बार प्रतिध्वनित होती है।

गोलघर के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी – Golghar Information in Hindi

गोलघर पटना शहर की एक बड़ी ईमारत है और यहां से पूरे पटना शहर का बहुत सुन्दर नज़ारा देखने को मिलता है। साथ ही गंगा नदी के तट पर होने के कारण इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। वर्ष 1979 में गोलघर को राज्य संरक्षित स्मारक (state protected monument) की सूची में शामिल किया गया ताकि इसकी उचित देखभाल करने के साथ-साथ टूरिज्म को बढ़ावा दिया जा सके। वर्ष 1999 तक इसका इस्तेमाल अनाज को भंडारित करने के लिए किया जाता था लेकिन फिर इस्तेमाल पर विराम दे दिया गया। कहा जाता है, गोलघर के भीतर अनाज का भण्डारण करने के लिए मजदूर इसके शिखर से अनाज को अंदर डालते थे। इसके शिखर पर ऐसी व्यवस्था मौजूद है जहां से अनाज को नीचे डाला जा सकता है। इसकी घुमावदार सीढ़ियों (spiral staircase) को मजदूरों को अनाज ऊपर तक ले जाने की सुविधा के नज़रिये से बनाया गया था। गोलघर की इन्ही खूबियों के कारण ये बेस्ट patna tourist places में शामिल किया जाता है।

गोलघर की संरचना – Structure of the Golghar

गोलघर बिहार राज्य का एक बहुत ही मशहूर टूरिस्ट स्पॉट है। इसकी खासियतों में शूमार इसका गोलाकार ढांचा लोगो के बीच उत्सुकता का विषय है। गोलघर स्तूपनूमा एक ढांचा है जिसके शिखर पर गुम्बद है। इसकी संरचना को बहुत ही गहन विश्लेषण के पश्चात् बनाया गया था। वहीं अगर बात की जाए की how golghar granary was filled तो मजदूरों को अनाज को शिखर तक ले जाने में कोई दिक्कत न हो इसके लिए इसकी सीढ़ियों को घुमावदार बनाया गया। कहा जाता है की इसके अंदर अनाज को डालने के लिए मजदूरों को अनाज को ऊपर तक ले के जाना होता था और फिर वो शिखर पर मौजूद छिद्र से अनाज को नीचे गिरा देते थे। कुछ इस तरह से अनाज को इसके अंदर भरा जाता था। मुख्य रूप से गोलघर के निर्माण के पीछे का उद्देश्य अनाज को संगृहीत कर के रखना था। तो इस तरह गोलघर वास्तु-कला (architecture) का एक अद्भुत नमूना है।

गोलघर से नज़ारे – View from Golghar

गोलघर के शिखर से पूरे पटना शहर का नज़ारा देखा जा सकता है। पहले ये पटना की सबसे ऊँची संरचना हुआ करती थी लेकिन अब धीरे-धीरे दूसरी, इस से भी ऊँची ईमारत बन रही है लेकिन इसे देखने का क्रेज़ आज भी लोगो में बना हुआ है। गंगा नदी के किनारे पर बने होने के कारण गोलघर से गंगा नदी का भी बहुत ही बेहतरीन और मनोरम दृश्य देखने को मिलता है। जो भी सैलानी यहां आते हैं इस ईमारत को कैमरे में कैद करना नहीं भूलते हैं। यदि गोलघर को आज के पटना की पहचान कहा जाए तो गलत नहीं होगा।

पटना में घूमने की जगह – Places To Visit In Patna In Hindi

पटना में गोलघर तो है ही घूमने के लिए लेकिन इसके अलावा भी पटना के प्रमुख पर्यटन स्थल मौजूद है जहां लोगो की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है। ये सब जगहें बहुत ख़ास हैं और इनका महत्व भी बहुत है। इन जगहों पर फैमिली या दोस्तों के साथ कभी भी घूमने जाया जा सकता है। ऐसी ही कुछ जगहें है :- इको पार्क, श्री कृष्णा विज्ञान केंद्र , महावीर मंदिर, बुद्धा स्मृति पार्क , पटना संग्रहालय , तख़्त श्री पटना साहिब गुरुद्वारा , संजय गाँधी जैविक उद्यान आदि। ये सब जगहें patna ke pramukhya paryatan sthal है जहां पर एक सैलानी के रूप जरूर जाना चाहिए।

वर्तमान के बिहार और अतीत के बिहार में बहुत बड़ा अन्तर देखने को मिलता है। आज का जो बिहार है उसने भारत के तक़दीर और तस्वीर दोनों को बदलते देखा है। बिहार की राजधानी पटना, प्राचीन काल (ancient period) में पाटलिपुत्र (patliputra) के नाम से जाना जाता था। इस शहर ने एक पूरी संस्कृति को बनते और बिगड़ते देखा है। ये शहर गवाह है अपने अतीत के विध्वंश का, लेकिन साथ ही आशान्वित है अपने उज्जवल भविष्य के लिए। बिहार की धरती बहुत सारे महापुरुषों की जन्म और कर्मभूमि रह चुकी है। शिक्षा , सांस्कृतिक गौरव , और आस्था को आज भी इसने एक धरोहर के रूप में सहेज के रखा है।

इस लेख के माध्यम से हमने आपको गोलघर क्यूँ बनाया गया था (why was the golghar built) और गोलघर का इतिहास क्या है की पूरी जानकारी मुहैया करने की कोशिश की है। इसी के साथ golghar patna history in hindi को समझना महत्वपूर्ण है ताकि गोलघर जैसे विशाल ढांचे की अहमियत और उसके इतिहास के तात्कालिक कारणों को समझा जा सके। किसी महत्वपूर्ण संरचना के बारे में जानना जरूरी है, ताकि हम खुद को अतीत के उस पृष्ठभूमि से अवगत करा सके जिसने वर्तमान को आकार देने का कार्य किया। गोलघर बिहार का प्रमुख दर्शनीय स्थल है जिसकी अपनी एक अहमियत है। जब भी patna tourist places in hindi की बात आती है तो इस स्थान का नाम सबसे ऊपर आता है। यही वजह है की हमने इस लेख में इस संरचना के बारे में जानकारी दी। साथ ही patna golghar kisne banwaya tha जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नो को भी इसमें शामिल किया है। इसके अलावा हमने गोलघर को बनाने का कारण और गोलघर में अनाज का भण्डारण कैसे किया जाता था, इसकी भी जानकारी दी। पटना में घूमने की जगह की बात की जाये तो बहुत अच्छे-अच्छे जगह मौजूद है जहां अपना समय बिताया जा सकता है। यदि आप भी पटना घूमने का मन बना रहे हैं तो इस स्थान पर घूमने के लिए जरूर जाये।

Leave a Reply

Your email address will not be published.